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यादों के जुगनू

हर रात बत्तियां भुझते ही तेरे खवाब फ़िर रोशन करता हूँ,

टिमटिमाते यादों के जुगनुओं को मुट्ठियों में भर लेता हूँ ,

सलवटों में बिखरी तेरी खुशबू किसी तेजाब से कम नही,

रूह में गहरे उतरे सुराख आज भी कम नही,

एक जुगनू मिला था बालकनी की रेलिंग पे,

पकड़ा तो सर्द हवा ने पलकों को बहा दिया,

एक टीमतिमाया कोफी के मग पे,

पिया तो हर प्याला जहन-0- दिल सुखा गया,

ड्रेसिंग टेबल पे भी एक जुगनू मिला,

छुआ तो सीशे में मेरे ही अक्स ने मुझे डरा दिया,

परदे के कोने से जब पहला उजाला आता है,

सब जुगनुओ को तकिये के नीचे छिपा देता हूँ

यादों को हकीकत की रोशनी से भस्म होने से बचा लेता हूँ,

रात तो फ़िर होगी, दिन भर उसी का इंतज़ार करूँगा ,

तकिये के नीचे सर रख आज फ़िर जुगनुओ से बातें करूँगा !

Comments

  1. Nice work pagle.. :p.. achchi shayari hai.. aur teri photography bhi mast hai.. loved the picture of the tree.. keep on writing.. waiting for more!!

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